अकेलापन
यह अकेलापन
जैसे की बर्फीली फिजाएं ,
यह अकेलापन
जैसे अधूरी कामनाएँ !
बस विरानियाँ ही ज़िन्दगी है
इनसे कोई कैसे बचाएं !
दूर तक सुनसान मंजर
हर तरफ बस रेत बंजर
जिनगी बोझिल सी लगती
देख न पता समंदर !
यह अकेलापन
जैसे की कोई एक परिंदा
है कहाँ उसको जाना
उसका न कोई है ठिकाना
बस हवाओं के सहारे
आसमा में ये बिचारे
रात का छाया अँधेरा
अब कहाँ ढूंढे बसेरा
बन जाये कोई सहारा
काब तलक न हो सवेरा !
यह अकेलापन
जैसे की उन्सुल्झी कथाएँ
जो कभी भी खत्म न हो
दे जो हर पल ही व्यथाएँ
क्या हो मन की भावनाएं
जब कोई भी पास न हो
क्या करे कोई विरह
जब मिलन की आस न हो !
कैसा है अपना मुक्कद्दर
जिसकी करुना हो न हम
पर बस उसी की ठाणे
ढूंढता उसको मैं दर दर !
यह अकेलापन
पीछा करती सी आत्माएं
जो रूह बनकर डराती
बेचैनियों को संग लती
इनसे तो बाचना है मुश्किल
हर घड़ी हर पल सताती !
यह अकेलापन
जैसे कि कोई रात बैठी
यादों की बारात बैठी
दर्द के किस्से छुपाये
एक अनकही सी बात बैठी !
यह अकेलापन
जैसे की बर्फीली फिजाएं ,
यह अकेलापन
जैसे अधूरी कामनाएँ !
बस विरानियाँ ही ज़िन्दगी है
इनसे कोई कैसे बचाएं !
दूर तक सुनसान मंजर
हर तरफ बस रेत बंजर
जिनगी बोझिल सी लगती
देख न पता समंदर !
यह अकेलापन
जैसे की कोई एक परिंदा
है कहाँ उसको जाना
उसका न कोई है ठिकाना
बस हवाओं के सहारे
आसमा में ये बिचारे
रात का छाया अँधेरा
अब कहाँ ढूंढे बसेरा
बन जाये कोई सहारा
काब तलक न हो सवेरा !
यह अकेलापन
जैसे की उन्सुल्झी कथाएँ
जो कभी भी खत्म न हो
दे जो हर पल ही व्यथाएँ
क्या हो मन की भावनाएं
जब कोई भी पास न हो
क्या करे कोई विरह
जब मिलन की आस न हो !
कैसा है अपना मुक्कद्दर
जिसकी करुना हो न हम
पर बस उसी की ठाणे
ढूंढता उसको मैं दर दर !
यह अकेलापन
पीछा करती सी आत्माएं
जो रूह बनकर डराती
बेचैनियों को संग लती
इनसे तो बाचना है मुश्किल
हर घड़ी हर पल सताती !
यह अकेलापन
जैसे कि कोई रात बैठी
यादों की बारात बैठी
दर्द के किस्से छुपाये
एक अनकही सी बात बैठी !
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